Thursday, January 18, 2018

श्री बद्रीनाथ धाम

                                    जय श्री बद्रीविशाल !


         भारत के चार धामों में से एक धाम श्री बद्रीनाथ धाम जोशीमठ(जिला चमोली ,उत्तराखंड ) से  लगभग 40 किलोमीटर की दुरी पर स्थित है। यह धाम धरती पर स्थित सबसे पवित्र और पावन धाम है जो अलकनंदा नदी के तट पर स्थित है । इसे वैकुण्ड धाम से भी जाना जाता है। यह धाम श्री नीलकटं पर्वत के नीचे स्थित नर-नारायण पर्वत पर स्थित है।
         पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवन विष्णु एवं शेषनाग के अवतार नर और नारायण जी ने इसी पर्वत पर कठोर तपस्या की थी जिसे आज नर-नारायण पर्वत से जाना जाता है। कहा जाता है की यह स्थान पहले केदार भूमि (शिव का स्थान ) के नाम से जाना जाता था। एक समय भगवान विष्णु तपस्या के लिए एक स्थान की तलाश कर रहे थे। तबै उन्हें ये भूमि दिखी जो उन्हें बहुत पसंद आया। तब उन्होंने चरणपादुका स्थल  (वर्तमान ) पर ऋषि गंगा और अलकनंदा नदी के संगम पर बाल रूप धारण कर रूदन करने लगे। यह देख माता पारवती जी का मन द्रवित हो गया। तब स्वयं माता पारवती व शिवजी वह प्रकट हो कर उन बालरूप विष्णु जी से उसकी इच्छा पूछी। तो बालरूप बहगवां विष्णु जी ने योगध्यान के लिए उनसे यह जगह मांग ली। इस तरह से माता पारवती व शिव भागवान जी ने बालक को यह जगह दे दी और फिर अपना बाल रूप त्याग कर विष्णु जी ने यह स्थान प्राप्त कर लिया।
         जब भगवान् विष्णु जी अपनी  तपस्या में लीन थे तब उस स्थान पर बहुत बर्फवारी हुई जिसे देख माता लक्ष्मी बहुत चिंतित व् दुखी हुई। तब उन्होंने भगवान् विष्णु जी के समीप जा कर एक बेर (बद्री ) के वृक्ष का रूप धारण कर समस्त हिमपात ,वर्षा  एवं धुप को अपने ऊपर सहन करने लगी। कई वर्षो  पश्चात तप समाप्त होने पर  उन्होंने माता लक्ष्मी की इस अत्यंत कठोर तपस्या से प्रसन्न हो कर वरदान दिया की है देवी क्यू की तुमने मेरी रक्षा के लिए बद्री के वृक्ष के रूप में मेरे ही बराबर तपस्या की है  इसलिए यह स्थान आज से बद्री- के- नाथ  के नाम से  प्रसिद्ध होगा। इस प्रकार भगवान् विष्णु एवं इस स्थान का नाम बद्रीनाथ पड़ा और जिस स्थान पर श्री विष्णु जी ने तप किया था वह स्थान तप्त कुंड नाम से विख्यात  है जहा बारह महीने गर्म पानी रहता है।
       इसके अलावा यहाँ पर गरुड़ शिला जो की अलकनंदा नदी के पास ही है ,प्रमुख दर्शनीय स्थल जैसे माता मूर्ति मंदिर,भीमपुल जो की माणा गांव में स्थित है। माणा गांव  में व्यास गुफा ,गणेश गुफा इत्यादि भी हैं। इससे आगे यहाँ पर वसुधारा फॉल व् सतोपंत सरोवर भी हैं जहाँ से पांडव स्वर्गरोहणी गए थे। 

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